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Monday, 20 December 2021

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 नांगल  परियोजना gk

यह परियोजना पंजाब राजस्थान तथा हरियाणा राज्यों की संयुक्त परियोजना है।  पंजाब में सतलुज नदी पर अनुकूल स्थान पर बनाई गई है। जहां नदी की धारा के दोनों और पहाड़ियां एक दूसरे के काफी निकट आ गई है। यहां भारत का सबसे ऊंचा बांध है आंखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह के नाम पर बांध के पीछे बने जलाशय का नाम गोविंद सागर रखा गया है। यह जलाशाय  हिमाचल प्रदेश में है। इस बांध से 1100 किलोमीटर लंबी नहर निकाली गई है। नैनो की 3400 किलोमीटर लंबी जल वितरित वितरित आएं हैं जिनमें एक 14 पॉइंट 600000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।  भाखड़ा बांध से 13 किलोमीटर नीचे नांगल में दूसरा बांध बनाया गया है।  यहां गंगवाल तथा कोटला पर  गिरी बनाए गए हैं।  इससे 1204 मेगावाट विद्युत का उत्पादन प्रतिवर्ष होता है।  इस परियोजना से हिमाचल प्रदेश पंजाब हरियाणा राजस्थान तथा दिल्ली राज्य लाभान्वित होते हैं। gk

व्यास परियोजना

यह पंजाब हरियाणा तथा राजस्थान राज्यों की संयुक्त परियोजना है जो व्यास नदी पर है। इससे व्यास उतना जल्दी उठ तथा पूर्व न्यू कोरियन जालंधर के निकट बांध का निर्माण किया गया है। इस बांध के द्वारा पंजाब तथा राजस्थान की 400000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। इसके  4060 मेगा वाट तथा 240 मेगा वाट विद्युत उत्पन्न की जाती है।  इंदिरा गांधी राजस्थान नहर परियोजना इंदिरा गांधी नहर परियोजना पूर्व में राजस्थान नहर परियोजना के नाम से जानी जाती थी। यह  नहर पंजाब में सतलुज और व्यास नदियों के संगम पर स्थित हरीके बांध से निकाली गई है। हरीके बांध से रामगढ़ तक इस महान की लंबाई 649 किलोमीटर है इसके द्वारा उत्तरी पश्चिमी राजस्थान में गंगानगर बीकानेर बाड़मेर तथा जैसलमेर जिलों में सिंचाई की जा सकती है। यह पंजाब हरियाणा व राजस्थान के 14 पॉइंट 500000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है।

 

कोसी परियोजना

कोसी नदी में आने वाली विनाशकारी बाढ़ की रोकथाम के उद्देश्य से इस परियोजना के लिए भारत और नेपाल में उनसे 54 में समझौता हुआ था। इस नदी पर बांध बनाए गए हैं जो बांध को रोकने तथा 8.8  लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई 24 मेगावाट विद्युत की सुविधा प्रदान करने की क्षमता रखते हैं।

हीराकुंड परियोजना

योजना उड़ीसा राज्य में महानदी पर संबलपुर से 14 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।  जिसमें तीन बांध हीराकुंड किरक पारा और बराज का निर्माण किया गया है। इससे महा नदी के डेल्टा प्रदेश की बाढ़ पर नियंत्रण किया जा सका है। इससे 25 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई तथा 27 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होता है। हीराकुंड बांध चार-पांच किलोमीटर विश्व का सबसे लंबा बांध है।

 

तुंगभद्रा परियोजना

यह  आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक राज्य की संयुक्त परियोजना है। इसमें तुंगभद्रा नदी पर मल्लपुरम के निकट 2 .1 मीटर लंबा और 4.38 मीटर ऊंचा एक बांध निर्मित है।  इससे तीन 3.92 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई तथा इस पर निर्मित दो विरोध गिरी 72000 किलोवाट विद्युत प्रदान कर रहे हैं।

नागार्जुन परियोजना

यह परियोजना आंध्र प्रदेश में नदी कुंडा गांव के पास कृष्णा नदी पर स्थित है।  बौद्ध विद्वान नागार्जुन के नाम पर इसका नाम नागार्जुन सागर रखा गया है। आज यहां पर सागर से जल सागर जल में भरा है।  पहले यहां अत्यंत सुंदर वास्तुकला के प्राचीन मंदिर थे। जिनमें एक एक पत्थर को हटाकर नए स्थानों पर ले जाया गया फिर वहां इन्हीं पत्रों से बिल्कुल पहले जैसे ही मंदिरों का निर्माण किया गया। यहां 93 मीटर ऊंचा तथा 1.450 मीटर लंबा बांध बनाया गया है। इससे 8 पॉइंट 5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है।

चंबल परियोजना  gk

आंध्र प्रदेश एवं राजस्थान राज्यों की संयुक्त परियोजना है।  इसके अंतर्गत राणा प्रताप सागर बांध गांधी सागर बांध तथा जवाहर सागर बांध बने हैं। कोटा बैराज तथा गांधी सागर बांध का कार्य सन 1960 में फुल मूवी आचरण में राणा प्रताप सागर बांध का फुल हो गया है। तृतीय चरण में जवाहर सागर बांध और 99 मेगावाट शक्ति का विरोध गिरी का निर्माण हुआ है।  तीनों चरणों के पूर्ण होने पर इस परियोजना में 386 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होता है।

 

दामोदर घाटी परियोजना

इस परियोजना की रूपरेखा अमरीका की घाटी के योजना परियोजना के अनुरूप तैयार की गई है।  बाढ़  को रोकना इस योजना का मुख्य उद्देश्य था।  इसमें तिलैया कोनार मैदान तथा पंचेत हिल पर बांध बने हैं।  दुर्गापुर तथा चंद्रपुर पर विद्युत गृहों का निर्माण किया गया है।  जिनसे 1077 मेगावाट तापीय और 104 मेगावाट विद्युत पैदा पैदा होती है। इस योजना से 5 पॉइंट 500000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।

 

गंडक परियोजना

बिहार उत्तर प्रदेश राज्य एवं नेपाल की संयुक्त परियोजना है। इस पर 159 करोड रुपए खर्चे  होंगे इसके द्वारा एक 11 पॉइंट 900000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।  किंतु कुल क्षमता 14 पॉइंट 58 लाख हेक्टेयर है।  इस पर एक विद्युत शक्ति गिरी का निर्माण किया गया है जिसकी क्षमता 15 मेगावाट है। gk

काकरापार परियोजना

यह गुजरात राज्य में सूरत से 80 किलोमीटर की दूरी पर ताप्ती नदी पर स्थित है।  इसका निर्माण कार्य 1963 में पूरा हो चुका है।  इसमें 161 मीटर लंबा और नदी तल से 14 मीटर ऊंचा बांध बनाया गया है।  इससे 505 किलोमीटर और 83 किलोमीटर लंबी दोनों हरे निकाली गई है। जिनसे 2 पॉइंट 27 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जाती है।

कोएना परियोजना

यह  महाराष्ट्र में कोई नदी पर स्थित है।  इस पर 250 मीटर ऊंचा बांध बनाया गया है।

मचकुंड परियोजना

उड़ीसा और आंध्रप्रदेश राज्यों की संयुक्त  है।  यह परियोजना मचकुंड नदी पर आंध्र प्रदेश अदा उड़ीसा राज्यों की सीमा पर स्थित है।

मलाप्रभा परियोजना

यह परियोजना कर्नाटक राज्य में किस ना कि सहायक मल परवन नदी पर स्थित है।  इस योजना के अंतर्गत जलगांव जिले में 154 पॉइंट 6 मीटर लंबा तथा 44 मीटर ऊंचा एक बांध बनाया जा रहा है जिससे 2 पॉइंट 300000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा रही है।

 

मयूराक्षी परियोजना

यह परियोजना पश्चिम बंगाल की मयूराक्षी नदी पर स्थित है।  इसके द्वारा लगभग 2.51 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।  इस परियोजना पर बने जल विद्युत गिरी से 4 मेगावाट विद्युत उत्पन्न की जाती है।

हंसदेब बांगो परियोजना

परियोजना छत्तीसगढ़ राज्य में हंस दिन नदी पर बनी है।  इस योजना के अंतर्गत 87 मीटर ऊंचा पत्थर का बांध बनेगा। इस बांध के जल से अयोग्य खुशियों की अतिरिक्त 3 पॉइंट 28 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी।

 

कंगसावती परियोजना gk

इस परियोजना के अंतर्गत पश्चिम बंगाल के  नदियों के मध्यवर्ती बांधों से जुड़े हुए तीन बैराज बनाए गए हैं।  450 200000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी। बार्गी परियोजना यह बहुउद्देशीय परियोजना मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में बाढ़ की नदी पर स्थापित होगी। जिससे 2 पॉइंट 400000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी। यह 10 वर्षीय योजना है जिससे जल विद्युत उत्पादन किया जाएगा। gk

भीमा परियोजना

महाराष्ट्र में पुणे जिले में पवना नदी पर 13 से 19 मीटर लंबा और 42 मीटर ऊंचा पावना बांध और सोलापुर जिले में कृष्णा नदी पर 2467 मीटर लंबा और 56 पॉइंट 4 मीटर ऊंचा उज्जैनी बांध बनाए जाएंगे।  जिनसे 139 किलोमीटर लंबी नहर निकाली जाएगी। इस परियोजना से 1 पॉइंट 600000 एकड़ भूमि की सिंचाई की जाएगी।

जायकवाड़ी परियोजना

यह परियोजना महाराष्ट्र राज्य में गोदावरी नदी पर बनाई जाएगी। इस पर प्रथम चरण में 137 मीटर ऊंचे नीचे मिट्टी के बांध का निर्माण होगा। इसमें 40 किलोमीटर नहर निकाली जाएगी जिसमें मंझौल गांव में थाना नदी पर 30 मार्च 5 मीटर और 6090 मीटर लंबा बांध बनाया जाएगा।  इस योजना से 2 पॉइंट 7 8 लाख हेक्टेयर भूमि सिची जा सकेगी।

उकाई परियोजना

परियोजना गुजरात में सूरत नगर से 116 किलोमीटर दूर गांव के निकट ताप्ती नदी पर बनाई गई है।  इस पर 4928 मीटर लंबा और 68 पॉइंट 6 मीटर ऊंचा बांध बनेगा। जिससे 15 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाएगी और 300 मेगावाट क्षमता का विद्युत संयंत्र लगेगा।

पेरियार घाटी परियोजना

इस परियोजना के अंतर्गत केरल राज्य में अलवर जिले के निकट पेरियार नदी बड़े एक दूषण मीटर 10 मीटर लंबा बैराज बनाया जा रहा है

पूर्णा परियोजना

इस योजना के अंतर्गत महाराज में पूर्ण किए जाएंगे। हरदा परियोजना इसके अंतर्गत शारदा घूमती दोआब क्षेत्र में शारदा बैराज बनाने की योजना है। जिससे निकलने वाली नहर पारा बाकी फैजाबाद सुल्तानपुर जौनपुर आजमगढ़ लखनऊ हरदोई सीतापुर जिला शाहजहांपुर बरेली और पीलीभीत जिले के ऊपर सिंचित करेगी।

सहाराबसी जल विद्युत परियोजना

इस परियोजना कर्नाटक राज्य में जोरा प्रताप के निकट बनी है।  यह  एशिया की सबसे बड़ी विद्युत  है।  इसका निर्माण भी 186 करोर रूपये की लगत से बानी है।  यह परियोजना मध्यप्रदेश में नर्मदा की सहायक तवा नदी पर होशंगाबाद में बनी है। इसके अंतर्गत 1627 मीटर लंबा 1 बांध बनाने की योजना है जिससे 3 पॉइंट 300000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी।

 

थीन बांध gk

पंजाब राज्य में तीन भागों में राज्य नदी पर 40 मीटर ऊंचा मिट्टी का एक बांध निर्मित किया जा रहा है ।

जिससे 3 पॉइंट 4 800000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी।

480 मेगावाट क्षमता का विद्युत केंद्र बनाया जाएगा।

इस  पर ₹263 करोर व्यय किए जाएंगे। नदी पर तलवारा के निकट हिमाचल प्रदेश में तो 16 मीटर लंबा और 12 मीटर ऊंचा यह बांध बनाया गया है।

इसका निर्माण पंजाब हरियाणा राज्य राजस्थान राज्यों के सहयोग से किया गया है।

टिहरी बांध परियोजना टिहरी बांध का निर्माण गढ़वाल हिमालय की महत्वपूर्ण नदी भागीरथी और सहायक नीलगंगा भिलंगना के संगम स्थल से 1.5 किलोमीटर दूरी में किया जा रहा है।

योजना के अंतर्गत नदी तल से 260 पॉइंट 5 मीटर सट्टा निर्मित बांध बनाए जाने का प्रावधान है।

बांध के पीछे निर्मित स्वामी रामतीर्थ सागर भागीरथी घाटी मे 45 किलोमीटर तथा केलांगन घाट में 25 किलोमीटर तक विस्तृत होगा।

जिसमें 32 किलोमीटर होगा जलाशय की जल ग्रहण क्षमता 2615 मिनियन घन मीटर होगी।

इसके फलस्वरूप ऊपरी गंगा प्रवाह क्षेत्र से प्रतिवर्ष 74 सौ मिलियन घन मीटर व्यर्थ वह जाने वाले जल का सदुपयोग किया जाएगा।

इस सत्र से गंगा यमुना से तूफान 70 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की जा सकेगी तथा 340 मेगा वाट जल विद्युत प्रवाह को बनाए रखने के लिए से 22 किलोमीटर जय कोटेश्वर नामक स्थान पर एक अन्य बांध बनाया जाएगा।

जिसे 150 मीटर मेगावाट अतिरिक्त जल विद्युत प्राप्त होगी ।

इसको योजना से बाढ नियंत्रण पर्यटन विकास मत्स्य पालन अतिरिक्त दिल्ली को उपलब्ध कराया जाएगा।

27 मीटर गहरे और 1100 मीटर लंबे  के आधार पर निर्माण पूरा होगा।

अब बांध के खतरे से बचाव के लिए काम पर बांध का निर्माण चल रहा है।

माताटीला बांध उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश के सहयोग से उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के पास बेतवा नदी पर बांध बनाया गया है।

इससे दो नहरे  निकाली गई है।

इसे हमीरपुर और जालौन जिलों की लगभग दुकान छोड़ 400001 भूमि सीची  जाती है।

अब इसका नाम बदलकर महारानी लक्ष्मीबाई बांध कर दिया गया है। gk

 

फरक्का बैराज परियोजना

यह योजना पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में कोलकाता बंदरगाह को साफ करने तथा हुगली नदी के जल को दूर करने के उद्देश्य से बनाई गई है। बिजली उत्पादन और निजी क्षेत्र की भागीदारी से लागू करने का फैसला किया है। इसके निर्माण समिति और संचालन का काम निजी क्षेत्र को सौंपा जाएगा।

बाणसागर परियोजना

यह परियोजना उत्तर प्रदेश बिहार तथा मध्य प्रदेश राज्यों की संयुक्त परियोजना है इसके अंतर्गत सोन नदी के पानी को एकत्रित किया जाएगा।

कुंडा परियोजना

यह तमिलनाडु राज्य की जल विद्युत परियोजना है जिसकी विद्युत उत्पादन की प्रारंभिक क्षमता 425 मेगावाट थी जिसे कुछ दिन पूर्व बढ़ाकर 535 मेगावाट कर दिया है।

शबरीगिरी परियोजना

केरल राज्य की इस विद्युत परियोजना की संस्थापक क्षमता 300 मेगावाट है । शबरी गिरी परियोजना केरल राज्य की इस विद्युत परियोजना की संस्थापक क्षमता 300 मेगावाट है ।बालीमेला परियोजना

उड़ीसा राज्य की एक जल विद्युत है । इसकी संस्था की क्षमता 360 मेगावाट है ।

यह परियोजना यह जम्मू कश्मीर राज्य की जल विद्युत परियोजना है जो चीना नदी पर बनी है यह तीन चरणों में बन रही है । जिसमें दो बनकर तैयार है प्रत्येक की क्षमता 115 मेगावाट है ।

कालिंदी परियोजना

कर्नाटक राज्य की जल विद्युत परियोजना है जिसकी विद्युत उत्पादन क्षमता 270 मेगावाट है ।

ईदुक्की परियोजना

केरल राज्य की विद्युत परियोजना की विद्युत उत्पादन क्षमता 390 मेगावाट है   ।

नर्मदा नदी घाटी परियोजना gk

इस परियोजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के 3000 बांध नर्मदा नदी पर बनाए जाएंगे ।नर्मदा नदी का उद्गम स्थल मध्यप्रदेश में है । यह गुजरात होती हुई 13 से 12 किलोमीटर की यात्रा करके अरब सागर में गिरती है । इन बांधों में से दो बांध नर्मदा सागर और सरदार सरोवर सबसे प्रमुख है। नर्मदा सागर बांध मध्य प्रदेश के निमाड़ जिले में पुनासा निकट बन रहा है। इस बांध के फल स्वरुप 1 पॉइंट 23 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी तथा 300 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा । सरदार सरोवर बांध गुजरात के भरूच जिले के बाद गांव निक्की निकट बनाया जा रहा है । इससे 15 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी और 300 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा नर्मदा इंदिरा सागर बांध की लागत ₹5000 तथा सरदार सरोवर की लागत 5000 करोड़ों रुपए तथा सरोज सरदार सरोवर बांध की लागत 13500 करो रुपए है । इस नदी पर ओंकारेश्वर और महेश्वर बांध बनाने का प्रावधान है । वह संपाद आंध्र प्रदेश की प्रथम पांच नदी पर स्थित है । इसकी सिंचाई क्षमता 2.2 चार लाख हेक्टेयर है 1 जून 1981 तक इसकी क्षमता 1 पॉइंट 53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचने की थी । gk

 

सोन परियोजना

बिहार की यह परियोजना सोन बांध के विस्तार रूप में स्वीकार की गई । इसकी कुल क्षमता 1 पॉइंट 6 1 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित करने की है ।

माही परियोजना

यह गुजरात राज्य में माही नदी पर स्थित है । इसमें दो बांध प्रथम बांध भंवरी गांव के निकट तथा दूसरा बांध कदाना गांव के निकट स्थित है । माही बजाज सागर परियोजना राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में माही नदी पर बोरखेड़ा 9 के गांव के निकट 1959 से 1960 में इसका कार्य प्रारंभ हुआ था । इसको तीन भागों में बांटा गया है । प्रथम चरण में बोरखेड़ा के निकट 3109 मीटर लंबा बांध बनाया गया है । द्वितीय चरण में सिंचाई के लिए दो नारे निकाली गई है । तृतीय चरण में  25 मेगावाट की दो विद्युत इकाई स्थापित की गई है ।जनवरी 1986 में राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री हरिदेव जोशी ने इस को राष्ट्र को समर्पित किया था

साबरमती परियोजना

इस परियोजना के अंतर्गत गुजरात राज्य में मेहसाणा जिले के धारी गांव के पास एक बांध निर्मित है । दूसरा हमारा वाद के पास नाबाद निर्मित किया गया है ।

पणाम  परियोजना

गुजरात के पंचमहाल जिले के केंद्र केंद्र जार गांव के निकट नाम नदी पर बनी है । इसमें कच्चे बांध का निर्माण किया गया है ।

कर्जन परियोजना

इस परियोजना के अंतर्गत गुजरात राज्य के कर्ज नदी पर अजीतगढ़ गांव के समीप एक कच्चा बांध बनाया गया है । भादरा कर्नाटक राज्य में भादरा नदी पर एक बहुउद्देशीय  का निर्माण किया गया है । इसके द्वारा 150 100000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है ।

कृष्णा

इस परियोजना के अंतर्गत कर्नाटक राज्य में कृष्णा नदी पर नारायणपुर बांध और अलमाटी बांध बनाए गए हैं। इस से 450 800001 केयर भूमि सिंचित होगी । घटप्रभा कर्नाटक राज्य में और बीजापुर जिलों में घटप्रभा नदी  चल रही है । इसके द्वारा 3.17 लाख की जाएगी योजना महाराष्ट्र है । इसके अंतर्गत बनाए गए हैं ।

ओपन गंगा gk

इस परियोजना के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य के यवतमाल जिले में शाहपुर गांव में पैनगंगा नदी पर दो जलाशय बने गए हैं ।परभरणी जिले में सावली गांव में विराग नदी पर एक अन्य बांध बनाया गया है । gk

परमबीकुलम आलियार 

यह तमिलनाडु और केरल राज्य की संयुक्त परियोजना है । इसमें 8 नदियों का पानी काम में लाया जाएगा । जिनमें से 6 नदियां अनमायिल आई पहाड़ियों की अध्यक्षता दो मैदानी क्षेत्र किया ।इसमें 1 पॉइंट जीरो लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी । नाथपा झकरी  हिमाचल प्रदेश में सतलज नदी पर निर्माणाधीन है । इस  में 250 मेगावाट की इकाई स्थापित की जा रही है । विद्युत  यह जम्मू कश्मीर राज्य में चुनाव नदी के ताले में स्थित है। इसकी कुल उत्पादन क्षमता 3 गुने 130 मेगावाट है । यह परियोजना फ्रेंडशिप कंसोर्सियम और एचपीसी के सहयोग से बनी हो रही है ।

उरी जल विद्युत 

यह परियोजना जम्मू कश्मीर राज्य की जल विद्युत परियोजना है । सुविधा यूके कंसोर्सियम द्वारा निर्मित है यह 4 गुने 120 मेगावाट विद्युत का उत्पादन कर रही है ।

सलाल जल विद्युत 

यह जम्मू कश्मीर राज्य की जल विद्युत परियोजना जो तीन चरणों में बन रही है । जिसमें दो बनकर तैयार है । प्रत्येक की क्षमता 115 मेगावाट है । रंजीत जल विद्युत परियोजनाओं सिक्किम राज्य की परियोजना है । इसकी उत्पादन क्षमता 3×20 मेगावाट है ।

समीरा जल विद्युत 

हिमाचल प्रदेश की जल विद्युत परियोजना है । इसकी तीन यूनिटों पर कार्य सही कार्य जारी है। इसके प्रथम चरण के उत्पादन तीन गुने 180 1 मेगावाट है । द्वितीय चरण की तीन गुनी  है ।

 

होली गंगा जल विद्युत 

उत्तर प्रदेश की प्रमुख जल विद्युत परियोजना है । इसके प्रथम चरण में उत्पादन क्षमता में 9 गुने 70 मेगा वाट है । इस परियोजना जल हेतु जापानी वित्तीय सहायता की संभावना का पता लगाया जा रहा है।

कोयल कारो जल विद्युत 

झारखंड राज्य की इसकी उत्पादन क्षमता 710 मेगावाट है ।अभी-अभी कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है । यह कोयल नदी पर निर्माण हेतु प्रस्तावित है ।

गोरी गंगा जल विद्युत gk

उत्तर प्रदेश की परियोजना है ।यह तीन चरणों में पूरी की जाएगी प्रथम चरण में 3 गुने 20 मेगा वाट द्वितीय चरण में 4 गुने 40 मेगा वाट तृतीय चरण में 3 गुने 40 मेगावाट विद्द्त उत्पादन होगी। gk

कोपित जल विद्युत

ये असम राज्य की परियोजना है। इसकी स्थापित क्षमता 150 मेगावाट है ।

दिव्यांग जल विद्युत 

नागालैंड की प्रमुख जल विद्युत है जो भूखा जिले में स्थित है । इसकी उत्पादन क्षमता 3 गुने 25 मेगावाट है । इस पर 331 पॉइंट 59 करोड़ रुपैया व्यय होने का अनुमान है ।

रंगानदी जल विद्युत 

अरुणाचल प्रदेश की प्रमुख जल विद्युत परियोजना है । यह सुभान गिरिजा नाम के निचले जिले में स्थित है । इसमें 135 मेगावाट की तीन यूनिटों को स्थापित करने का प्रावधान है । दूसरे चरण में एक 100 मेगावाट विद्युत उत्पादन की जाएगी ।

पापू मन जल विद्युत 

अरुणाचल प्रदेश की परियोजना है इसकी भी उत्पादन क्षमता 1 मेगावाट है।

धीनकरण जल विद्युत 

अरूनाचल प्रदेश की परियोजना है । इसकी विद्युत उत्पादन क्षमता 1 मेगावाट है ।

बाकी जल विद्युत 

जो अभी अरुणाचल प्रदेश की परियोजना है । इसकी उत्पादन क्षमता 75 मेगावाट है ।

धालेश्वरी जल विद्युत 

मिजोरम की जल विद्युत परियोजना है । इसकी उत्पादन क्षमता 120 मेगावाट है ।

अपार लोहित जल विद्युत gk

अरुणाचल प्रदेश की परियोजना है । इसकी उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट है । gk

तूही बाई जल विद्युत 

यह मिजोरम राज्य की परियोजना है। इसके उत्पादन क्षमता 310 मेगावाट है।

 

काम में जल विद्युत 

 

अरुणाचल प्रदेश की परियोजना है । इसकी उत्पादन क्षमता 600 मेगावाट है ।

 

दमबे जल विद्युत 

 

अरुणाचल प्रदेश की परियोजना है । लोकतक जल विद्युत परियोजना एवं मणिपुर राज्य की परियोजना है । यह मणिपुर नदी पर स्थित है ।

 

कोटेश्वर जल विद्युत 

 

उत्तराखंड की परियोजना है । यह भागीरथी नदी कितनी चढ़ी धारा में 103 पॉइंट 5 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनाया जाएगा । इसमें 400 मेगावाट विद्युत उत्पादन की जा सकेगी ।जल विद्युत विकास निगम लिमिटेड के नेतृत्व में गढ़वाल जिले में क्रियान्वित हो रही है ।

 

स्वर्णरेखा gk

 

26 अक्टूबर 1917 को उड़ीसा और झारखंड राज्य में इस परियोजना के लिए एक समझौता हुआ । जिसके अंतर्गत स्वर्णरेखा नदी पर और बांधों का निर्माण किया जाएगा । इन बांधों से दोनों राज्यों के लगभग 700000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी ।

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गिरना 

 

योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र के नासिक जिले में गांव के पास गिरना नदी पर बांध का निर्माण चल रहा है। हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त रूप से विद्युत परियोजना के पर हस्ताक्षर किए इस परियोजना के तहत रहा है ।

 

राजघाट बांध 

 

किस नदी पर बांध परियोजना का नाम बदल कर रानी लक्ष्मीबाई का नाम कर दिया है।

 

पेंच 

 

यह संयुक्त योजना दोनों मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र राज्यों के छिंदवाड़ा व एवं नागपाल जिले की सीमाओं पर स्थित है । बांध  इस योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश महाराष्ट्र राज्यों की सीमा पर स्थित सिरपुर पर एक बांध का निर्माण एवं महाराष्ट्र की पुजारी टोला पर एक बैराज का निर्माण किया गया है ।

 

काली सरार 

 

बांध परियोजना की पूरक योजना है । इस  के पूरा होने पर बांध नहर प्रणाली के द्वारा महाराष्ट्र की 3522 हेक्टेयर भूमि एवं मध्य प्रदेश की 1174 हेक्टेयर भूमि सिंचित करना प्रस्तावित है ।

 

52 घड़ी gk

 

इस परियोजना के अंतर्गत भंडारा जिले में स्थित कौन सा के निकट एक बांध के निर्माण का प्रस्ताव है । इस बांध द्वारा एकत्रित जल क्षमता का दोनों देशों के बीच बराबर बराबर बंटवारा होना है । बहुउद्देशीय परियोजना ग्रेटर गंगो बांध की जनवरी 1977 में मध्य उत्तर प्रदेश के बीच 10 बहुउद्देशीय परियोजना का कार्य हाथ में ले लिया गया । इस परियोजना से छतरपुर एवं पन्ना जिले की भूमि पर सिंचाई की प्रस्तावित है । gk

 

उर्मिल 

 

उर्मिल  एक अंतरराष्ट्रीय सिंचाई परियोजना है ।

इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश में उत्तर प्रदेश के बीच सन 1970 में हुए एक समझौते के अनुसार यह तय किया गया था कि उर्मिल नदी पर ग्राम के पास एक बांध बनाया जाएगा ।

जवाई बांध परियोजना पाली जिले में जवाई नदी पर यह एरिनपुरा पर रेलवे स्टेशन से 2 पॉइंट 5 किलोमीटर दूरी अरावली पर्वत की गोद में एक बांध 1956 में बनाया गया था ।

इस बांध से 22 किलोमीटर लंबी नहर निकाली गई जो सिखाओ और उप सिखाओ सहित 176 किलोमीटर लंबी है ।

इस  से पाली जिले के 26550 हेक्टेयर और जालौर जिले में 14860 हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है ।

राजस्थान सरकार ने इस  क्षेत्र की नहरों के आधुनिकरण हेतु भी अलग से एक योजना बनाई है ।

जवाई  से पश्चिमी राजस्थान में सिंचाई सुविधाओं के विकास में काफी मदद मिली है ।

जाखम   का निर्माण उदयपुर जिले के आदिवासी क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं के विकास हेतु किया गया ।

इस योजना के अंतर्गत एक बांध चित्तौड़गढ़ जिले की प्रतापगढ़ तहसील के अनूप पूरा गांव के पास जाखम नदी पर बनाया जा रहा है ।

इस योजना से उदयपुर और प्रतापगढ़ जिले के 104 गांव में सिंचाई की जाएगी ।

इस पर एक विद्युत गिरिड बनाया गया है जो 4 पॉइंट 5 मेगावाट क्षमता का है ।

 

पार्वती 

 

इसके अंतर्गत धौलपुर के निकट पार्वती नदी पर एक जलाशय बनाने की योजना है । इस जलाशय का प्रवाह क्षेत्र 795 वर्ग मीटर है । इससे एक नहर निकालकर 35000 एकड़ भूमि की सिंचाई की जा रही है । 1959 में आरंभ हुई इसकी मुख्य नहर की लंबाई 56 किलोमीटर है । उरई प्रयोजन आदित्य पंचवर्षीय योजना में चित्तौड़गढ़ जिले में हो रही नदी पर बांध बनाया गया है । इस बांध की मुख्य नहर की लंबाई 34 किलोमीटर है । इससे चित्तौड़गढ़ भीलवाड़ा जिले में गेहूं ना कपास तिलहन आदि सी हेतु सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है । इस बांध के निकट पर्यटन स्थल का विकास किया गया है ।

 

रामगंगा 

 

गंगा की सहायक नदी रामगंगा गढ़वाल जिले के कलाकार में 25 मीटर लंबा और 125 मीटर ऊंचा बांध बनाया गया है। इस  से 100000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता 108 है । इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बाढ़ का प्रकोप कम हुआ है ।

 

शारदा सहायक gk

 

इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले प्रमुख कार्य था घाघरा के ऊपर 1003 मीटर लंबा बांध 28 किलोमीटर की संपर्क नहर शारदा नदी पर 8 से 11 मीटर लंबा बांध 260 किलोमीटर लंबी फीडर नहर 6050 किलोमीटर लंबी वितरण प्रणाली का निर्माण एवं 2570 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण उपर्युक्त कार्य 5 चरणों में पूरा होना है । इसमें प्रथम तथा द्वितीय चरण पूर्ण हो गया है । शेष तीन चरणों पर कार्य चल रहा है ।अब तक संपूर्ण हुए निर्माण कार्य कुल 15 पॉइंट 8200000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता से 10 पॉइंट 600000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता उत्पन्न की जा चुकी है । रिहंद बांध अथवा गोविंद बल्लभ सागर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर नगर से 161 किलोमीटर दूरी पर स्थित पिपरी नामक स्थान पर इस योजना का कार्य चल रहा है । इस योजना प्रदेश की महत्वपूर्ण एक विशाल योजना है । इस योजना पर उसे 30 पॉइंट 5 करोड़ रुपए में किए गए हैं ।मिर्जापुर के रेणुकूट नामक स्थान पर स्थापित एल्यूमीनियम संयंत्र को इस से विरोध उपलब्ध होती है । साथ ही इसके द्वारा सोन नदी की सिंचाई क्षमता में भी काफी वृद्धि हुई है । इसका दूसरा नाम रिहंद बांध परियोजना भी है । gk

 

गंडक 

 

इस परियोजना में उत्तर प्रदेश अता बिहार संयुक्त रूप से कार्य कर रहा है । नेपाल को भी इस से विद्युत की सुविधाएं उपलब्ध होंगी । इस योजना की सिंचाई क्षमता 14 पॉइंट 500000 हेक्टेयर भूमि है 740 मीटर लंबे बैराज का कार्य योजना के अंतर्गत हो गया है खोल दी गई है । नरोरा परमाणु शक्ति  उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में नरोरा नामक स्थान पर परमाणु शक्ति योजना का निर्माण किया जा रहा है ।इस परियोजना की कुल 2 इकाइयां हैं जिनकी संयुक्त क्षमता 470 मेगावाट है ।

 

सिंगरौली सुपर ताप विस्तार  gk

 

उत्तर प्रदेश में स्थित सिंगरौली सुपर ताप बिजली घर के संग्रह संप्रेषण लाइनों के निर्माण की  को योजना का आयोजन आयोग ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है । इस परियोजना पर लगभग 154 करोड़ पांच ₹59 होने का अनुमान है । योजना के अंतर्गत सिंगरौली विस्तार योजना की 14 किलो वाट बिजली उत्तरी ग्रिड में है । बिजली परेशन की भारी केंद्रों पर पहुंचाई जा सकेगी । राजस्थान परमाणु विद्युत  की चौथी इकाई चालू भारत नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड एनपीसीआईएल की रावतभाटा विस्तृत राजस्थान परमाणु विद्युत परियोजना की चौथी इकाई को 3 नवंबर 2000 को चालू कर दिया । 220 मेगावाट की दवा विकृत पानी भारी पानी रिएक्टर वाली इस इकाई को शीघ्र ही उत्तरी ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा । जिससे देश में कार्यशील नाभिकीय रिएक्टर ओं की कुल संख्या 14 हो जाएगी । जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2700 मेगावाट होगी । gk

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