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Monday, 20 December 2021

मराठा राज्य और सिखों का उदय तथा राज्य gk

 

मराठा राज्य और सिखों का उदय तथा राज्य(Gk)

 

संस्थापक शिवाजी थे। उसकी मृत्यु के बाद यह राज्य कमजोर हो गया। परंतु बाद में पैसा के हाथ से आने पर शक्तिशाली हो गया। पानीपत की तीसरी लड़ाई 1761 के पहले तक उनका राज्य समस्त दक्षिण में उत्तर भारत में फैला हुआ था। परंतु इस लड़ाई में पराजित होने के बाद ही इनकी शक्ति क्षीण होती चली गई है।

1218 में अंग्रेजों के साथ यूद्धमें मराठा राज्य सदैव के लिए लुप्त हो गया और इसे अंग्रेजी राज्य में मिला दिया गया। शिवाजी 1627-1680 अहमदनगर के सरदार शाहजी भोंसले के पुत्र थे।

अपनी मां से बहादुरी की कहानियां सुनकर उसने मुसलमानों से युद्ध कर लिया था। राजा ने उसे धोखे से भाग निकला। उसने राजा की उपाधि धारण की।

उनकी माता जी के पुत्र उसने अफजल खान को प्राप्त किया मिर्जा राजा जयसिंह ने उसे धोखे से पकड़वा दिया। परंतु वह चालाकि से आगरा के किले से भाग निकला। (Gk)

1674 में रायगढ़ के किले में उसने राजा की उपाधि धारण की और 1680 में वह परलोक सुधार किया। उनके मंत्रिमंडल में 8 सदस्य थे,जिन्हें अष्टप्रधान करते हैं।

शिवाजी के बाद उनके पुत्र संभाजी 1689 ने राज किया परंतु बाद में औरंगजेब ने उसे पकड़वा दिया। फिर उसका सौतेला भाई राजाराम साहू 1689 से 1705,उसका पुत्र शिवाजी द्वितीय 1706-1707, गद्दी पर बैठा समाधि का पुत्र साहू 1707 से 1748।जब औरंगजेब की मृत्यु के बाद जेल से छूटा और वह शासक बना ।

(Gk) किसानों का शासन 1734 1818 कस्बों में बालाजी विश्वनाथ 1714 से 1720 बाजीराव प्रथम 17 से 20 से 1740 बालाजी बाजीराव 1761 है। इनमें बाजीराव राज्य का विस्तार किया।

मालवा गुजरात हुआ बुलंद खंड को मराठा राज्य में मिला दिया। बालाजी बाजीराव ने उसकी भारत में राज्य बनाया परंतु राजपूतों सीखो वह जाटों से सहयोग नहीं मिलने के कारण तथा मुसलमानों द्वारा हमदशाह अब्दाली की मदद करने के कारण वह पानीपत के युद्ध 1761 में पराजित हो गए। (Gk)

इसके उपरांत मराठा शक्ति का पतन आरंभ हो गया। सिखों का उदय तथा राज्य 1795 से 1849 सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक थे। जिनका जन्म 1769 में लाहौर में हुआ था।

चिंतन तथा भ्रमण द्वारा उन्होंने बहुत ही ज्ञान प्राप्त किया और सिख पंथ की नींव डाली व समाज सुधारक थे। और जातिवाद तथा छुआछूत में विश्वास नहीं रखते थे। (Gk)

सिख पंथ में 110 गुरु हुए गुरु अर्जन ने अमृतसर में स्वर्ण मंदिर का निर्माण कराया। गुरु हरगोविंद सिंह ने इनको सैनिक जाति में बदल दिया ।  लोहागढ़ नामक दुर्ग बनवाया। एनकेनाबे गुरु तेग बहादुर कि इस्लाम धर्म स्वीकार न करने के कारण औरंगजेब ने 1675 में हत्या करा दी थी। (Gk)

अंतिम गुरु गोविंद सिंह ने इनको खालसा का नाम दिया उनकी हत्या एक अफगान गोदावरी के तट पर 1760 में कर दी। अहमद शाह अब्दाली के आक्रमण के दौरान सीख सकती बढ़ गई और इनके बाद रंजीत सिंह ने 1799 में लाहौर जीतकर इसे अपनी राजधानी बना लिया।

बाद में उसने पंजाब कश्मीर आप गानों की पहाड़ी भाग को अपने राज्य में मिला लिया 1839 में रंजीत सिंह की मृत्यु हो गई।  बाद में प्रथम सिख युद्ध 1845 तथा द्वितीय युद्ध 1849 में राज्य का पूर्णतया समाप्त हो गया और अंग्रेजी राज में मिला लिया। (Gk)

सिख धर्म गुरु और उनके कार्य 1469 से 1538, गुरु नानक देव 1538 से 1552, गुरु आनंद 1552 से 1574 इस बीच गुरु अमरदास 1574 से 15 से 81, ईसवी गुरु रामदास 1581 से 1646 भी गुरु अर्जुन देव 1606-1645 गुरु हरगोविंद सिंह, 1645-1661 श्री गुरु हर राय 1661-1664, गुरु हरकिशन 1664-1675, गुरु तेग बहादुर 1675

श्री गुरु गोविंद सिंह जिसमें सिख गुरुओं ने कार्य किए गुरु नानक देव सिख धर्म की स्थापना की।  गुरु आनंद गुरुमुखी लिपि लिपि के जनक गुरु अमर दास धर्म प्रसार हेतु बाबा। इस गलियों की स्थापना गुरु रामदास अमृतसर की स्थापना 1577 गुरु अर्जुन देव स्वर्ण मंदिर की नींव रखी। (Gk)

गुरु ग्रंथ साहब का संकलन व गुरु हरगोविंद सिंह अकाल तख्त की स्थापना सिखों की को लड़ाकू जाति में बदलना गुरु हर राय उत्तराधिकारी मुगलों के युद्ध में भाग गुरु हरकिशन अल्प वयस्क अवस्था में ही मृत्यु तेग बहादुर इस्लाम कबूल करने का गुरु गोविंद सिंह। (Gk)

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