Subscribe Us

Latest Update

Monday, 20 December 2021

भारत का राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन 1857 से 1947

 Contents

भारत का राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन 1857 से 1947

 

भारत का राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन 1857 से 1947- राष्ट्रीयता की भावना औरंगजेब की मृत्यु के बाद भारत की एकता समाप्त हो गई ।इसका प्रारंभ स्वयं उन्हें अपनी धार्मिक कट्टरता तथा पक्षपात के द्वारा कर दिया था। परिणामस्वरुप राजनीतिक तथा उसके विरुद्ध हो गए थे। बाद में उसके विचारों ने अपने-अपने राज्य कायम कर लिए। दक्षिण में मराठा राज्य स्थापित हुआ परंतु यह सब आपस में लड़ते रहे। इसका लाभ मराठों को मिला। प्लासी के युद्ध 1757 से लेकर प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पत्थर सावंत भारत पूर्ण रूप से अंग्रेजी राज के पक्ष में आ गया। इस राज्य में भारतीयों ने अनेक अत्याचार और अपमान सहा अंत में उन्हें राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न हुई। इसके मुख्य कारण से धार्मिक तथा सामाजिक भावना आदि के कारण भारतीय सभ्यता संस्कृति राष्ट्रीयता की भावना जागृत हो गई थी।

इसके द्वारा राष्ट्रीयता की भावना इतिहास का ज्ञान इसके मुख्य कारण से कारण थे।धार्मिक तथा सामाजिक भावना आर्य समाज, ब्रह्म समाज, रामकृष्ण मिशन आदी के प्रभाव के कारण भारतीयों में अपनी सभ्यता संस्कृति स्वाभिमान देशभक्ति राष्ट्रीयता की भावना जाग्रित हुई।भारतीय समाचार पत्र के द्वारा समाचारों का प्रचार प्रसार एक दूसरे के विचार राष्ट्रीयता की भावना तथा एकता की भावना और समाज की बुराइयों सामने आई। पश्चात शिक्षा इसमें भारतीय इतिहास का ज्ञान अन्य देशों की स्वतंत्रता की भावना वह आंदोलन आदित्य परिचित कराया। अंग्रेजों द्वारा शोषण अंग्रेज व्यापारी बनकर आए थे और अंत पर व्यापारी ही रहे। अपना माल बेचकर तथा भारत का कच्चा माल थी उन्होंने शोषण किया। राजनीतिक स्थिति का लाभ उठाकर चोरों ने भारतीयों को खूब लूटा।

भारत का राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन 1857 से 1947
भारत का राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन 1857 से 1947

सन 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम

सन 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम- इसे गदर तथा सैनिक विद्रोह के नाम से भी पुकारा जाता है, परंतु वास्तव में या भारतीयों का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। जिसके कारण से डलहौजी की यह रणनीति बादशाहो राजाओं तथा जमींदारों के प्रति दूर देवा सैनिकों की बेकारी कृषि उद्योग धंधों की छाती व शोषण समाजिक हस्तक्षेप ईसाई धर्म का प्रचार सैनिकों के साथ दुर्व्यवहार किया। बैरकपुर में मंगल पांडे नामक सैनिक ने एक अंग्रेज अफसर की 29 मार्च 58 को हत्या कर दी परिणाम स्वरुप उसे फांसी दे दी गई। इसके विरूद्ध मेरठ छावनी के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया और 10 मई को वे दिल्ली फतह के लिए चल दिए। नाना साहब ने अपने कब्जे में ले लिए झांसी की रानी तात्या टोपे ने विद्रोह में भाग लिया परंतु विद्रोह की असफलता का मुख्य कारण तथा एकता की सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। भाभी का भी निर्धारण किया की स्थापना की दिशा में दूसरी बात करना थी सुरेंद्रनाथ बनर्जी दादा भाई नरोजी संस्था के संस्थापक थे।जनता के बीच की भावना जागृत का प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता में हुआ उसका के अधिकारों की रक्षा करना था। इतिहास में विभक्त किया जा सकता था। सरकार के सामने रखते थे और उन्हें दूर नेता लोग भक्त थे और ना ही अपनी मांगे पूरी करते थे।संस्था का विश्वास रखती दिमाग खराब कर दिया तथा उन्हें 100 साल हो गए। इसके सुधार की बात हुआ था और किया क्योंकि सरकार से संबंध नहीं रखना चाहता था।

तृतीय काल 1919 से 1929

तृतीय काल 1919 से 1929 या राष्ट्रीय आंदोलन काल था। जिसे गांधी जी ने संचालित किया क्योंकि गोखले तथा तिलक का देहांत हो चुका था। गांधी जी ने असहयोग आंदोलन स्वदेशी आंदोलन सत्याग्रह आमरण अनशन आदि चलाए। उत्सव सफलता प्राप्त की 1919 के सत्याग्रह के कारण रॉलेक्ट एक्ट के विरोध जलियांवाला बाग का हत्याकांड हुआ। 1920 का असहयोग आंदोलन अधिक सफल हुआ परंतु असहयोग आंदोलन चोरा चोरी कांड के कारण वापस लेना पड़ा। मोतीलाल नेहरू तथा स्वराज पार्टी का निर्माण किया एवं साइमन कमीशन का बहिष्कार किया गया जिसके परिणाम स्वरूप लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई।

 

चतुर्थ काल 1929 से 1947

चतुर्थ काल 1929 से 1947-यह काल पूर्ण स्वतंत्रता की मांग का काम था जिसे जवाहरलाल नेहरू ने संचालित किया। 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की गई ।तीन गोलमेज कांफ्रेंस जिनमें पहली में कांग्रेस ने भाग लिया। दूसरी में गांधी जी ने गए थे परंतु निर्णय सांप्रदायिक थे। तीसरी के द्वारा गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट पारित हुआ, जिससे प्रांतों की सरकारें कांग्रेस द्वारा बनाई गई। 1942 में क्रिप्स मिशन भारत आया जो वह सफल रहा है। कांग्रेस ने भारत छोड़ो प्रस्ताव 1942 पारित किया जो सफल हुआ। सुभाष चंद्र बोस ने जो भारत छोड़कर चले गए थे। मालाया में आजाद हिंद फौज बनाई जो द्वितीय महायुद्ध की समाप्ति के पश्चात समाप्त हो गई। वित्तीय युद्ध के बाद इंग्लैंड की लेबर सरकार के शिष्टमंडल भारत भेजा जिसने भारत की जनता की संतुष्टि की भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम द्वारा भारत को 15 अगस्त 1947 को दे दी गई।

No comments:

Post a Comment